मुलुंड के अनिल कैंसर क्लिनिक के डॉक्टर अनिल हेरुर द्वारा 91 वर्ष की दादी मां का गर्भाशय के ट्युमर का ऑपरेशन करने में सफलता मिली है। इस लेडी को ब्लीडिंग की तकलीफ थी। इस केस में ब्लीडिंग होने की वजह यह थी कि उनके गर्भाशय में ट्युमर था। लोगों के जहन में जब यह ख्याल आता है कि 91 की उम्र की दादी मां का ऑपरेशन करना ठीक होगा या नही, लेकिन यहां सवाल सिर्फ ऑपरेशन का नहीं रहता। सवाल यह भी होता है कि उनकी क्वालिटी आफ लाइफ कैसी है। उनकी इस बीमारी की वजह से उनका लगातार ब्लीडिंग का प्रॉब्लम आ रहा था। लगातार ब्लीडिंग की वजह से हीमोग्लोबिन की कमी आ जाती है जिस वजह से उनको बहुत कुछ सहना पड़ता है। जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है वैसे वह यूरिनरी ट्रैक में जाता है जिस से बहुत सारी तकलीफ है होती है। तो ऐसे केसे में ऑपरेशन करके उनको रिलीफ दिया जाए तो उनकी क्वालिटी आफ लाइफ बढ़ जाती है और यही बात डॉक्टर अनिल हेरुरने पेशेंट के परिवारजनों के सामने रखी। पहले परिवारजनों को भी ऑपरेशन के बारे में चिंता होने लगी कि इस उम्र में ऑपरेशन करना दादी मां सह पाएंगे या नहीं। लेकिन जब उनके परिवारजनों को इस बारे में अवगत कराया गया तो परिवारजन और दादी मां ऑपरेशन के लिए राजी हो गए।

इस केस में दूसरी दिक्कत यह थी कि इस उम्र में ऑपरेशन के बाद ज्यादा पेन हुआ तो पेसंट ऑपरेशन के बाद फिजियोथैरेपी वगैरा करना छोड़ देते हैं और उसमें रिजल्ट खराब हो जाते हैं। इसीलिए अनिल हेरुर की टीम ने यह निर्णय लिया के वह उनका ऑपरेशन रोबोटिक तरीके से करेंगे। जब रोबोटिक तरीके से ऑपरेशन होता है तो दर्द बहुत कम होता है और रिकवरी जल्दी होती है। इस रोबोटिक सर्जरी में गर्भाशय ओवरसीज का टेस्टिंग नई पद्धति से किया गया। इसकी जरूरत इसलिए रहती है कि गर्भाशय के आसपास के भागों में कैंसर फैला तो नहीं है उसकी टेस्टिंग करना जरूरी हो जाता है। इस रोबोटीक पद्धति में आजकल वह पूरे ग्रान्ट्स नहीं निकल जाते। डॉक्टरों द्वारा उसका एक सैंपलिंग किया जाता है जिसको सेंटिनल नोड्स बोलते हैं। इसमें एक तरीके का डाय डाला जाता है जिससे उसे सेंटिनल नोड से यह पता चलता है की कैंसर फैला हुआ है या नहीं। उसके बाद डॉक्टर अनिल हेरुर और उनकी टीम द्वारा दादी मां का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया और इसका रिजल्ट यह आया कि दूसरे ही दिन दादी मां चलने फिरने लगी थी। तीसरे दिन उनको हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी दिया गया। इस तरीके से डॉक्टर अनिल हेरुर ने उनको एक अच्छी लाइफ दी और कैंसर अर्ली स्टेज में था तो उनकी सर्जरी भी अच्छे से हो गई। डॉ अनिल हेरुर ने इस बारे में आगे बताया कि की कैंसर को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए। आज बहुत सारी मेडिकल टेक्नोलॉजी उपलब्ध है जिससे कैंसर ट्रीटमेंट को अच्छे से किया जा सकता है और उसका रिजल्ट भी इंप्रूव किया जा सकता है।

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